Sardar Udham Singh Real Story

Welcome to Study Gujarat दोस्तो आज हम ऐसे क्रांतिकारी की बात करने जा रहे हैं जिन्हें ‘Patient Assasin‘ और ‘lone Assasin’ जैसे खीताब दिए गए हैं यह वही क्रांतिकारी है जिन्होंने लंदन में जाकर ब्रिटिश ऑफिसर michael O’dwyer की हत्या की थी और उनका नाम है Sardar Udham Singh.

Sardar Udham Singh का जन्म और बचपन

दोस्तों Sardar Udham Singh का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर district के सुनाव नाम के गांव में हुआ था उनके बचपन का नाम शेर सिंह था. 1901 में बहुत छोटी सी उम्र में ही उनके सर से मां का साया छीन जाता है उसके बाद उनके पिता तेहलसिंह बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए अमृतसर आ जाते हैं लेकिन वहां पहुंचने के कुछ समय बाद में ही उनके पिता की मृत्यु हो जाती है.

⇒ इस लिए सरदार उधम सिंह और उनके बड़े भाई मुक्तासिंह की परवरिश पुतलीगढ़ के ऑर्फन खालसा में होने लगती है और वहां पर उन्हें सरदार उधम सिंह नाम दिया जाता है . मां-बाप के खोने के सदमे से अभी उभरे ही नहीं थे कि उनके भाई भी 1913 में उनका साथी साथ छोड़ जाते हैं 1917 में अपने मैट्रिक की परीक्षा पास करते हैं उसके बाद में manual लेबर के तौर पर ब्रिटिश इंडियन आर्मी को Join कर लेते हैं. 1919 में इंडिया वापस आने के बाद उनकी रिवॉल्यूशनरी करियर की शुरुआत होती है.

Turning into a revolutionary

दोस्तों ऐसा माना जाता है कि Sardar Udham Singh जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय वहां मौजूद थे उन्होंने ब्रिटिश रूल के उस गिनोने चेहरों को अपनी आंखों से देखा था और इसे देखकर बदला लेने की प्रतिज्ञा ली थी और कहा जाता है जलियांवाला बाग हत्याकांड का एक अहम रोल था Sardar Udham Singh को क्रांतिकारी बनाने के लिए.

  • लेकिन यह मानना भी गलत नही होगा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड को सरदार उधम सिंह को क्रांतिकारी राह पर चलाया…

जैसे कि फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान यह प्रॉमिस किया गया था कि जो ब्रिटिश इंडियन आर्मी जॉइन करेगा उसे जमीन , पैसा और रिवार्ड्स दिए जायेंगे Sardar Udham Singh भी उसी बेनिफिट्स के लिए आर्मी ज्वाइन कर लेते हैं. लेकिन 2 साल आर्मी में served करने के बाद उनके हाथ में सिर्फ 200 रुपए ही थे अंग्रेज अपना प्रॉमिस पूरा नहीं करते इस लिए Sardar Udham Singh को लगता है उनके साथ दोखा हुआ है.

इसी दौरान गदर पार्टी के लोग पंजाब मे रिवॉल्यूशनरी लिट्रेचर बांट रहे थे इस तरह ब्रिटिश के हाथों में मिले धोखे और जलियांवाला बाग हत्याकांड के गुस्से की वजह से Sardar Udham Singh गदर रिवॉल्यूशनरी को ज्वाइन कर लेते हैं .

अपने गदर पार्टी के दिन के दौरान उनका Contact बहुत रेडिकल Nationalists से होता हे जेसेके Saifuddin Kitchlew और मोटा Singh.

और 1922 Sardar Udham Singh इंडिया वापस आकर अमृतसर में एक शॉप खोल लेते है जो उनकी रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी का सेंटर बन जाता है उसी दौरान बब्बर अकाई मूवमेंट के संपर्क में भी आते हैं और 1924 में मेक्सिको के जरिए U.S मे illegaly घुस जाती है और सन फ्रांसिस्को में सेटल हो जाते हैं जो कि गदर पार्टी का सेंट्रल था U.S मेही Sardar Udham Singh गदर मूवमेंट के साथ जुड़ जाते हैं.

सरदार उधम सिंह ग़दर movement से जुड़ने के बाद.

जुड़ने के बाद 3 साल तक U.S में रहते हैं इस दौरान न्यूयॉर्क,शिकागो जैसी सिटी में काम भी करते हैं सरदार उधम सिंह ने इसी दौरान 2 हॉलीवुड मूवी में Extras का रोल भी किया था उसका नाम है The Elephant Boy , ‘The Four Feathers’ और अलग अलग कंपनी में लेबर का काम भी किया खुद अपनी पार्टी आजाद पार्टी भी लौंच की.  जापान,हांगकांग,मलेशिया सिंगापुर जैसे देशों में गदर पार्टीकी ब्रांच के साथ contact बनाते है.

सरदार उधम सिंह पेहली बार जेल जाते है.

july 1927 anti-कुलोनियल स्ट्रगल को ridiklais करने के लिए वापस india आते है आपने साथ Arms,guns और स्ट्राइक प्रोपोगेन्डा भी लेकर आते लेकीन इन्हें 30 august 1927 अमृतसर में उन्हें arms act तहत अरेस्ट कर लिया जाता है और उन्हें 5 साल की जेल हो जाती है और जेल में भी बाकी कैदियों को revolutionary ideas से organize करने की कोशिश करते हैं इसलिए उन्हें कोढे मार कर कोलिटर करफाइन में डाल दिया जाता है.

authorities के लिए उन्हें मैनेज करना मुश्किल होता था इसलिए उन्हें एक जेल से दूसरे जेल ट्रांसफर किया जाता है उसी दौरान nianwali जेल में जो आज पाकिस्तान पंजाब में है वहां उन्हें भगत सिंह से मुलाकात होती है भगत सिंह यहां सांडर्स की हत्या और एसेंबली में बम गिराने की सजा काट रहे थे सरदार उधम सिंह की जल्दी ही भगत सिंह से दोस्ती हो जाती है.

तो दोस्तों इस पोस्ट में इतना ही आगे की स्टोरी हम अगले part में बताएँगे तो थोडा इन्तेजार कीजये हम जल्द ही आपके सामने दूसरा part लेकर आयेंगे.

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