Important Battles Of India | भारत के महत्वपूर्ण युद्ध

आप सभी का स्वागत है आज हम पढने वाले हैं भारत के महत्वपूर्ण युद्ध ( Battles of India) के बारे में जहा हम युद्ध (Battles of India) से बनने वाले सभी प्रश्न और महत्वपूर्ण युद्ध ( Battles of India ) के बारे में बताएंगे जेसे वह युद्ध किसके बीच में हुआ , कौन जीता और उस युद्ध की सभी जानकारी जो आपके Exam के लिए महत्वपूर्ण है और सभी Battles की Ninja तकनीक के साथ आपको समजायेंगे ताकि आप उसे कभी भूल ना सको.

अगर आप S.S.C, RRB NTPC, Civil Services, Banking, Railway, RBI, Clark, IBPS, UPSC, GPSC, Police, Defence, SBI PO, SBI Clerk, Indian Army SSC CGL, State Exam या और कोई Exam जहा History से सबधित Subject से प्रश्न पूछे जाते है उसमे युद्ध (Battles) वाला कोइना कोई प्रश्न तो जरुर होता है तो आज आपको युद्ध (Battles of India) के बारे बहुत अच्छी चीज़ सीखनेको मिलेगी जिसे आप हमारी Ninja तकनीक से कभी भूल नही पाओगे. 

Contents

भारतके महत्वपूर्ण युद्ध (Battles of india).

तो चलिए स्टार्ट करते हे बिना और समय गवाते हुए इस युद्ध battles के बारे में.

Battle Hydaspes | हाईडेस्पीज का युद्ध

यह लड़ाई 361 ई.पू में The ग्रेट सिकंदर और राजा पोरस के बिच हुई थी.

जिसमे राजा पोरस को हरा कर सिकंदरने विजय हासिल करि थी.  

Battles of Kalinga War | कलिंगा की लड़ाई

यह लड़ाई 271 ई.पू में अशोक सम्राट ने कलींगा पर आक्रमण किया जो अशोक सम्राट द्वारा विजयी प्राप्त की गई.

कलींगा एक प्राचीन राज्य था अभी वह दक्षिणी उड़ीसा में स्थित है. उस समय व्यापारिक मामलों के लिए कलींगा बहुत महत्वपूर्ण था यही मुख्य वजह से अशोक सम्राट ने कलींगा पर आक्रमण किया था.

लेकिन युद्ध में खून खराबे को देखकर अशोक सम्राट ने युद्ध न करनेकी  कसम खायी और कलिंगा अशोक सम्राट की आखिरी लड़ाई बन गई.कलिंगा लड़ाई के बाद अशोक सम्राट ने बौद्ध धर्म अपना लिया और बौद्ध धर्म का अनुयाई बन कर बौद्ध धर्म का प्रचार किया…

Battle of Sindh | सिंध का युद्ध.

सिंध का युद्ध वर्ष 712 में हुआ था जो सिंध के राजा दाहिर और मोहम्मद बिन कासिम के बीच में हुआ था.

जिसने मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध के राजा दाहिर को मार दिया था और मोहम्मद बिन कासिम ने यह लड़ाई में विजय प्राप्त कर दी थी.

मोहम्मद बिन कासिम ने विजय के बाद अरबो की सत्ता स्थापित की थी और मोहम्मद बिन कासिम भारत पर आक्रमण करने वाले पहले मुसलमान बने गए थे जिनका ताल्लुक अरब के “ताइफ” शहर से है.

FAQ | ज्यादा बार पूछे गए प्रश्न

इस लड़ाई की पूरी जानकारी :- 

तो अब हम जानते हैं इस लड़ाई के बारे में ये लड़ाई किस वजह से हुई उसका मुख्य उद्देश्य क्या था.

जैसे आपको पता ही है भारत में विदेश से लोग मसाले और महत्वपूर्ण चीजें लेने के लिए आते थे क्योंकि पहले से ही भारत कृषि प्रधान देश रहा है और उसमें मसाले वगैरा ज्यादा तोरसे बनते थे.

वैसे ही ईरान के गवर्नर अल हज्जाज अपने सेवकों को आदेश देते हे भारत से मसाले और बहुमूल्य वस्तु लाने के लिए और उनके सेवक भारत के लिए रवाना हो जाते हैं कुछ मसाले और बहुमूल्य वस्तु लाने के लिए.

लेकिन उनके सेवक बहुमूल्य वस्तु लेकर आही रहे थे और बीच में दयबुल जो सिंध प्रांत में था वहां कुछ समुद्री लुटेरो द्वारा जहाज को लूट लिया जाता है और समुद्री लुटेरे बहुमूल्य चीजें और मसाले लूट कर वहां से चले जाते हैं.

यह समाचार सुनकर अल हज्जाज बहुत गुस्से में आ जाते हैं फिर वो सिंध के रजा दाहिर को ख़त लिखते हैं और कहते हैं की जो भी इस लूट से हमारा नुकसान हुआ है उनकी भरपाई की जाए और यह खत राजा दाहिर को मिलता है और वह जवाब में खत लिखते हुए कहते हैं “ डाकू मेरी प्रजा नहीं है और मैं उन्हें दंड देने में असमर्थ हु “ जब यह समाचार अल हज्जाज ने सुने तो वो और ज्यादा गुस्से हो गये.

और अल हज्जाज ने सोचा कि अब सिंध पर आक्रमण करना ही पड़ेगा फिर वह अपने सैनिकों को आदेश देते है सिंध पर आक्रमण करने के लिए जिसका नेतृत्व मोहम्मद बिन कासिम कर रहे थे जो कि अल हज्जाज के भतीजे और दामाद है फिर मोहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध पर आक्रमण किया जाता है जो कि किसी मुसलमान द्वारा भारत पर किया गया पहला आक्रमण था.

इस Battles of India का part -2 भी पढ़े सभी जानकारी 1 और 2 part में cover होंगी part 2 के लिए यहा क्लिक करे 

Battle Of Tarain | तराइन के युद्ध

First Battle Of Tarain | तराइन की पेहली लड़ाई

तराइन का युद्ध 13 नवंबर 1191हरियाणा के तराईन” में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच में हुआ था.जिसमें पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को हराकर विजय प्राप्त की थी.पृथ्वीराज चौहान पंजाब , अजमेर (राजस्थान) और उत्तर प्रदेश के शासक थे.

इस लड़ाई की पूरी जानकारी :-

पहली कहानी : – मोहम्मद गोरी 1191 में ही पंजाब में जगह है भटिंडा उसको जीत लिया था और आगे सभी जगह को जीतने के लिए आ ही रहे थे जिनके समाचार पृथ्वीराज चौहान को मिलते हैं वह उन्हें अच्छा नहीं लगता और उनको रोकने के लिए निकल जाते हैं जो पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा के तराइन  में उनका आमना-सामना हो जाता हे और उन दोनों के बिच में युद्ध होता है.

दूसरी कहानी : – कई इतहासकार द्वारा एक और कहानी यह बताई जाती है कि जो कन्नौज के राजा जयचंद थे उनकी बेटी संयोगिता और पृथ्वीराज चौहान को एक दुसरे से मोहब्बत हो जाती है और दोनों भाग कर शादी कर लेते है.वह राजा जयचंद को अच्छा नहीं लगता और वह मोहम्मद गोरी को आमंत्रित करते हे पृथ्वीराज चौहान को मार कर अजमेर, राजस्थान और दिल्ली पर सत्ता स्थापित करने के लिए

Second Battle Of Tarain | तराइन की दूसरी लड़ाई

तराइन का दूसरा युद्ध मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच हरियाणा के तराईन में वर्ष 1192 में हुआ था. इसमें पृथ्वीराज चौहान को मारकर मोहम्मद गोरी ने विजय प्राप्त की थी.

जैसे कि आपको पता ही है पहले तराइन के युद्ध के बारे में पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को हरा दिया था उसका ही बदला लेते हुए मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज से युद्ध किया लेकिन इस बार मोहम्मद गोरी तैयारी के साथ आया था और उसने पृथ्वीराज चौहान को मारकर युद्ध जीत लिया

इस लड़ाई की पूरी जानकारी :-

पहले तराइन में हारने के बाद मोहम्मद गोरी 1 साल बाद वापस आता है हार का बदला लेने के लिए और मोहम्मद गोरी पहली हार के बाद सबकुछ समझ गया था तो पृथ्वीराज चौहान को सीधा हराना बहुत मुश्किल है कुछ नई तकनीक से काम करना पड़ेगा.

फिर मोहम्मद गोरी सीधे पृथ्वीराज को युद्ध के लिए ही नहीं कहते वह कहते हैं पृथ्वीराज चौहान को के वो आपस में संधि करेगी और फिर जैसे ही रात होती है तो पृथ्वीराज चौहान और उनकी सेना सो जाती है और फिर मोहम्मद गोरी जल्दी सुबह पृथ्वीराज चौहान की सेना पर आक्रमक कर देते हैं सोती हुई सेना पर और पृथ्वीराज चौहान की सेना अपने आपको तैयार नहीं कर पाती और मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज चौहान को मारकर युद्ध जीत जाते हैं और पंजाब अजमेर,राजस्थान उत्तर प्रदेश में सत्ता स्थापित कर देते हैं.

Battle Of Chandawar | चंदावर का युद्ध

मोहम्मद गोरी और राजा जयचंद के बीच 1194 में यमुना नदी के किनारे चंदावर में हुई थी जो कि आज का फिरोजाबाद शहर है.

जिसमें राजाजयचंद बुरी तरह मुत्यु के बाद मोहम्मद गोरी ने विजय प्राप्त किया.

इस युद्ध की पूरी जानकारी :-

तराइन के युद्ध को जीतने के बाद मोहम्मद गोरी ने क़ुतुबुद्दीन ऐबक को अपना गवर्नर बनाकर अपनी राजधानी गजनी चला जाता है.

कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद गोरी का गुलाम था जो आगे चलकर दिल्ली सल्तनत और गुलाम वंश की नीव रखता है. ऐबक बहुत कम समय में कई राज्यों को जित लिया था और मोहम्मद गौरी का पसंदीदा बन गया था.

कुतुबुद्दीन ऐबक को सभी राज्यों को जीतता देख राजा जयचंद को पता चल गया था कि मोहम्मद गोरी पूरे भारत का बेताज बादशाह बनना चाहता है और राजाजयचंद जहां के राजा थे कनौज वहां खतरा है. मोहम्मद गोरी कभी भी आक्रमण करवा सकता है.

तो राजा जयचंद आक्रमण की पूरी तैयारी कर रहे थे जब ये बात मोहम्मद गोरी को पता चलती है तो वह खुद भारत आ जाता है और मोहम्मद गोरी के नेतृत्व में एक सैन्य तैयार करता है कनौज पर आक्रमण करने के लिए यह युद्ध मोहम्मद गोरी ने खुद नहीं लड़ा था लेकिन उसके गवर्नर और गुलाम बुद्ध द्वारा लड़ा गया था.

इस Battles of India का part -2 भी पढ़े सभी जानकारी 1 और 2 part में cover होंगी part 2 के लिए यहा क्लिक करे 

 

परीक्षा में आपको मोहम्मद गोरी ही लिखना है क्योंकि कुतुबुद्दीन ऐबक तो उनका गवर्नर और गुलाम था.

मोहम्मद गोरी जानता था कि कनौज एक बहुत बड़ा साम्राज्य है अगर उसको पुरे भारत का बेताज बादशाह बनना है तो कनौज को जितना बहुत महत्वपूर्ण है इसी लिए वह अपने पसंदीदा आदमी को नेतृत्व सोप्ता है.

शुरुआत में राजा जयचंद की सेना मोहम्मद गौरी की सेना पर हावी थी और युद्ध जीतने ही वाली थी और राजा जयचंद खुद ही कमांडर थे और आगे से लड़ रहे थे तभी अचानक कुतुबुद्दीन ऐबक एक तीर चलाते हैं जो राजा जयचंद की आंख में जाकर लगती है और वह हाथी से गिर जाते हैं और राजा जयचंद की बुरी तरह से मृत्यु हो जाती है और मोहम्मद गौरी यह युद्ध जीत जाते हैं.

Battle Of Panipat | पानीपत का युद्ध

First Battle Of Panipat | पानीपत का पेहला युद्ध

पानीपत की पहली लड़ाई 21 अप्रैल 1526 को पानीपत में जो अभी का हरियाणा है उसमें बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच लड़ी गई थी जिसमें बाबर ने इब्राहिम लोदी को बुरी तरह हराकर विजय प्राप्त की थी और दिल्ली सल्तनत का का खात्मा हुआ था इब्राहीम लोधी की बात करें तो वह लोदी वंश और दिल्ली सल्तनत के आखरी सुलतान थे.

इस युद्ध की पूरी जानकारी :-

इब्राहिम लोदी के भाई दौलत खान ने दौलत खान लोदी जो कि पंजाब के गवर्नर थे उन्होंने बाबर को आमंत्रित किया इब्राहिम लोदी को घर फेंकने के लिए और बाबर ने आमंत्रण स्वीकार किया और इब्राहिम लोदी को हराने के लिए निकल पड़े.

पानीपत भारत में होने वाली पहली लड़ाई थी जिसमें बारूद और टॉप का इस्तेमाल हुआ बाबर द्वारा और इब्राहिम लोदी बुरी तरह से यह युद्ध हार जाते हैं और लोदी वंश और दिल्ली सल्तनत का पूरी दिल्ली सल्तनत का बुरी तरह खात्मा हो जाता है इसी जंग को जीतने के बाद मुगल साम्राज्य की नींव रख दी जाती है बाबर द्वारा.

इस Battles of India का part -2 भी पढ़े सभी जानकारी 1 और 2 part में cover होंगी part 2 के लिए यहा क्लिक करे

Second Battle Of Panipat | पानीपत का द्वितीय युद्ध

पानीपत का दूसरा युद्ध 5 नवंबर 1556 में अकबर और हेमू के बीच हुआ था. जिसमे अकबर ने हेमू को हराकर विजय प्राप्त की थी.

इस युद्ध की पूरी जानकारी :-
बाबर जरूर 1526 में पहली पानीपत की विजय के बाद भारत में अपना छोटा सा साम्राज्य बनाने में कामयाब रहा था.  लेकिन 20 साल बाद उसकी मृत्यु हो जाती है उसके साथ ही शेरशाह सूरी बाबर के बेटे हुमायु को पराजित कर साम्राज्य छीन लेता है.

लेकिन जैसेही शेरशाह की मृत्यु हो जाती है और ये समाचार सुन कर हुमायु फिर से वापस आता है और 1545 में अपना सम्राज्य वापस स्थापित कर लेता हे  लेकिन शेरशाह के बेटे आदिलशाह को हेमचंद जेसा सेनापति मिला गया था.1556 में सुर साम्राज्य जो पहले पूरे दिल्ली पर ” कब्जा जमाया आब बंगाल तक ही सीमित था ” 

और इसी साल हुमायु की मौत हो गई और 13 साल का अकबर अब शासक था उसका सेनापति जो बाबर काल से था बेहरामखान वो अकबर के साथ था.

”  मुगलों को हेमू ने लगातार 22 बार हराया था और दिल्ली भी जित लिया और मुग़ल दिल्ली छोड़ कर भाग गए और बेहराम खान अकबर को लेकर भाग गया “

लाहोर का एक ही हिस्सा जो मुगलो का था और वोभी हेमू जितना चाहता था पर दील्ली की हार के बाद अकबर की सेनाको जंगल से जा रही हेमू की सेना की छोड़ी एक टुकड़ी मिलते है जिनके पास गोला बारूद और टोपे  थी वो अकबर की सेना छोटीसी लड़ाई के बाद आपने पास ले लेती है.

येही टर्निंग पोइट था अकबर की जित का और अकबर के पास दोगुना असला बारूद और टोपे हो जाती है.

और दिन था 5 नवम्बर 1556 और जगह पानीपत और हेमू के सामने मुग़ल सेना और सेनापति बेहरामखान के साथ छोड़ा सा अकबर 15 साल का.

सेनापति बेहरामखान के साथ अकबर और साथमें खूब सारा असला बारूद और टोपे और सामने हेमू नेतुत्व में सूरी साम्राज्य की सेना.

युद्ध सुरु होता है और सुरु से ही हेमू इस युद्ध में आगे था और युद्ध जितने वाला ही था लेकिन अचानक एक तीर चलता है जो सीधा हेमू के आख पर जा कर लगता हे और उनकी सेना सेनापति को गिरता देख भाग जाते है.और मुगल के सामने हेमू जिन्दा पकड़ा जाता है .

और ये युद्ध अकबर जित जाता है. फिर बेहराम खान हेमू को मरने के लिए आगे बढ़ता है लेकिन महान अकबर मना कर देता है लेकिन बेहरामखान ने हेमू का सर कलम कर दिया.

Third Battle Of Panipat | पानीपत की तृतीय लड़ाई

तृतीय पानीपत 14 जनवरी 1761 को मराठा और अफगानों के बीच में हुई. मराठा के सेनापति थे सदाशिव भाऊ और अफगान सेनापति अहमद शाह अब्दाली इस युद्ध में अहमद शाह अब्दाली ने मराठा को हराया था और विजय प्राप्त की थी.

लड़ाई की पूरी जानकारी :-

औरंगजेब की मृत्यु के बाद वर्षों से भारत पर मुगल साम्राज्य का कब्जा जमाया था वह बिखर गया था उत्तर भारत के महत्वपूर्ण इलाके जहां पहले मुगल का साम्राज्य था अब मराठा साम्राज्य बन चुका था लेकिन अब उनका सामना अहमद शाह अब्दाली 1759 में पख्तून और बलोच को मिलाकर विशाल सेना तैयार कर ली थी अब्दाली ने 17 जून 1761 में मराठी की कमान बाजीराव के बेटे बालाजीराव समाल रहे थे बालाजीराव अपने बेटे विश्वास राव को मुगल सिगासन पर बैठाने का मन मना लिया था.मराठा ने पूरी भारत को जीतने का मन बनालिया था और एक एक राज्य कर जीते जा रहे थे 1758 के लाहौर पर अपना कब्जा करने के बाद तैमूर शाह दुर्रानी को उखाड़ फेका था वो अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली के बेटा था.

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ये बात सुनकर अहमद शाह अब्दाली को बहुत गुस्सा आया उसने भारत पर हमला करने का मन बना लिया और पंजाब जहां मराठा की कम सेना थी वहां हमला कर जीत लिया और मुगल दो भागों में बट गए भारत के मुगल मुसलमान और विदेश से भारत शासक करने आए मुगल भारत के मुगल मुसलमान थे वह मराठा के पक्ष में थे और विदेशी मुगल और विदेशी शासक की राह देख रहे थे वह अपना शासन शुरू करें वह अहमद अब्दाली ने पूरी कर दी.

अब्दाली पंजाब,कश्मीर जीतकर अब दिल्ली जितने का मन बना लिया और फिर होती है पानीपत की तृतीय लड़ाई जो 17 जनवरी 1761 को पानीपत हरियाणा में हुई. उस लड़ाई में अब्दाली ने मराठा को हरा दिया और दिल्ली और भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर दिया मराठों के हार के पीछे मुख्य कारण यह बताया जाता है मराठों का आपस में झगड़ा और जो भारतीय मुगल मुसलमान थे उनका सच्चे मन से मराठा का साथ ना देना.

FAQ | परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

अशोक सम्राट VS कलिंगराज जिसमे अशोक सम्राट की विजय हुईं थी.
पृथ्वीराज चौहान VS मोहम्मद गौरी जिसमे पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई थी
पृथ्वीराज चौहान VS मोहम्मद गौरी जिसमे मोहम्मद गौरी की विजय हुई थी .
राजा जयचंद VS मोहम्मद गोरी जिसमे मोहम्मद गोरी की विजय हुई थी
बाबर और इब्राहिम लोदी जिसमें बाबर ने विजय प्राप्त किया था

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