Battle of india | भारत के महत्वपूर्ण युद्ध

आज हम जो पेहले आर्टिकल में कुछ battle of india के बारे में जानकारी रह गयी थी वो आज के इस पोस्ट में बतायेगे अगर आपने पहला आर्टिकल नहीं पढ़ा तो यहाँ क्लिक करके उसे पढ़े ताकि सभी जानकारी समज में आ सके.

तो चलिये Battle of india का part-2 सुरु करते है अगर part-1 नहीं पढ़ा तो उसे पेहले पढ़े यहा क्लिक करे 

Contents

Battle of Khanwa | खानवा का युद्ध

दिन था 16 मार्च 1527 का और आमने – सामने थे बाबर और राणा सांगा और युद्ध होता है खानवा का .

जिसमें बाबर ने राणा सांगा को हरा दिया और विजय प्राप्त की

युद्ध  की पूरी जानकारी :-

माना जाता है सही में इस लड़ाई के बाद मुगल साम्राज्य स्थापित हुआ मजबूत तरीके से स्थापित हुआ.

बाबर काबुल से भारत पर फतह करने की निकल जाता है उसका भारत पर विजय प्राप्त करने का सपना बहुत बड़ा था और उसने बहुत बड़ा अपना लश्कर बना दिया था .

बाबर झेलम नदी से भारत में आते हैं जो सफल रहता है पहले पानीपत विजय के बाद कई लड़ाई जीत कर भारत के कई राज्य में सत्ता स्थापित कर दी और दिल्ली में भी सत्ता स्थापित कर दी.

राणा रायमल के पुत्र राणा सांगा जिसने संग्रामसिंह भी कहा जाता है उन्होंने अफगानों की सत्ता खत्म कर राजपूतों की सत्ता भारत में स्थापित कर दी

मुगल राजा बाबर पूरे भारत को जीतना चाहता था और रना संगा भी  यह  युद्ध बाबर और राणा सांगा के ताकत की लड़ाई थी और उनके वर्चस्व की लड़ाई थी.

और बाबर एक के बाद एक भारत राज्य जीतते जा रहा था और राणा सांगा समझते थे कि वह और अफगानों की तरह लूटपाट कर दिल्ली से वापस चला जाएगा  और बाद में राणा सांगा दिल्ली पर कब्जा कर लेंगे लेकिन वेसा नहीं था उसने तो पुरे भारत को जितने का मन बना लिया था और राणा सांगा को ये बात पता चलता है बाबर जल्दी भारत  छोड़ने वाला नहीं है.

और अब राणा ने बाबर को भारत से उखाड़ फेकने का मन बना लिया था और 16 मार्च 1527 को राणा और अकबर का ना-सामना हो जाता है इसमें राणा सांगा के साथ वसीम चंदेरी महमूद लोदी इब्राहिम लोदी के भाई थे और सामने बाबर की सेना बाबर ने लश्कर के साथ फतेहपुर के खानवा पहुंचता है लेकिन  राणा सांगा और उनकी सेना खानवा में बाबर का इंतजार करते हुए पहले से ही बैठी थी.

बाबर ने पानीपत की तरह इस युद्ध में भी उसी रणनीति के साथ था लेकिन इस युद्ध में राणा सांगा काफी आगे थे और राणा सांगा इस युद्ध को जीतने वाले थे लेकिन बाबर के पास ज्यादा लश्कर और गोला-बारूद और तोपो का इस्तेमाल कर बाबर ने युद्ध को अपने पक्ष में मोड़ कर इस युद्ध को अपने नाम कर लिया.

बाबर ने राणा सांगा को बुरी तरह हराकर खानवा का युद्ध विजय कर दिया ” खानवा के युद्ध को जीतने के बाद बाबर गाजी की उपाधि मिली थी” और बाबर का मुख्य केंद्र दिल्ली बन चुका था सही में इस युद्ध को जीतने के बाद मूगल और मजबूत हो गया

Battle of chanderi | चंदेरी का युद्ध

चंदेरी का युद्ध 21 जनवरी 1528 बाबर और राजपूतों के बीच में हुआ था जिसमें बाबार ने राजपूतों को हरा दिया था और विजय प्राप्त कर दी थी

युद्ध  की पूरी जानकारी :-

चंदेरी मेदनीराय की सत्ता में था बाबरने मेदनीराय पर आक्रमण किया और 20 जनवरी 1528 आक्रमण किया और 20 जनवरी चंदेरी पहुंचा और फिर मेदनीराय ने चंदेरी के किल्ले को राजपूतो के साथ मिल कर चंदेरी के किल्ले को बांध कर देते डर के जो 230 फुट ऊंचा चंदेरी का किल्ला था.

और य देख बाबर ने मेदनीराय के सामने संधि करने का प्रस्ताव रखा लेकिन मेदनीराय ने संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया और बाबरने चंदेरी के किल्ले पर आक्रमण शुरू कर दिया .

बाबर को इस समय एक बुरी खबर मिलती है कि अफगानों ने कन्नोज पर आक्रमण की और  मुग़ल शाही सेना को भगा दिया है और लखनऊ से कन्नौज कीओर शाही सेना भाग आते है.

लेकिन बाबर ने किल्ले पर हमला जारी रखा और राजपूतों ने आखिर निरास हो कर वीरता पूर्वक लडनेकी थान और फिर बाबर और राजपूतों के बीच में युद्ध जमकर शुरू हुआ और फिर राजपूतो को हरा कर बाबर ने चंदेरी के किल्ले पर सत्ता स्थापित कर दी.

Battle of Ghaghra | घाघरा की लड़ाई

घाघरा का युद्ध 6 मई 1529 में घाघरा नदी के पास बाबर और अफगान के साथ युद्ध हुआ जिसका अफगानों का नेतृत्वम हमूद लोदी गाने कर रहे थे जिसमें बाबर ने मोहम्मद लोधी के नेतृत्व में लड़ाई कर रही अफगानों को हराया था…

युद्ध  की पूरी जानकारी :-

बाबर की चंदेरी और कई जीतो के बाद भी अफगानों का अंत नहीं हुआ था और महमूद लोदी राणा सांगा के साथ कानोज युद्ध में बाबर से हार ने के बाद आब अफगानों के साथ था.

और मोहम्मद लोधी इब्राहिम लोदी के भाई थे उसने बिहार को जीत लिया था और यह बात बाबर को पता चलती है और बाबर एक सेना आगे से ना भेजता है और खुद अपनी सेना के पीछे जाता है.

जब बाबर आ रहा था तब वो बात अफगान सुनते हे और डरकर तितर-भीर हो जाते हैं और बाबर बनारस होते हुए बक्सर आ रहा था वहां कई अफगानो ने उसको स्वीकार लिया था.

और महमूद लोधी बंगाल की में शरण में था और बाबर बंगाल पोहचता हे और 6 मई 1529 को घागरा की लड़ाई में बाबर ने अफगानों को हरा दिया और बाबर ने विजय प्राप्त की और लोधिओ की बच्ची कुची आशा ईसी युद्ध के बाद चली गई.

बाबर युद्ध के बाद बीमारी के चलते 28 दिसम्बर 1530 को बाबर की मृत्यु हो गई.

Battle of Chausa | चौसा का युद्ध

चौसा का युद्ध 26 जून 1539 को हुमायु और शेरशाह सुरी के बीच में हुआ था इसमें शेरशाह सूरी ने हुमायु को हराया था.

युद्ध  की पूरी जानकारी :-

बाबर की मृत्यु के बाद अब सत्ता उनके बेटे हुमायु के हाथ में थी .

हुमायु अपनी बंगाल में विजय के बाद निश्चित होकर आराम करने लगता हे लेकिन शेरशाह शुरी कनोज और बहुत सारी जगह अपने सत्ता में लेलेता हे.

हुमायु को ये बात का पता चलता है और आग्रा के लिए निकल पड़ता है.

शेरखान बक्सर के पास चौसा नामकी जगह पर मुगलों को बुरी तरह हरा देता है और हुमायूं भाग कर घोड़े के साथ ही गंगा में कूद पड़ा लेकिन निजाम खान ने उसे डूबने से बचा लिया.

” शेरशाह की उपाधि शेरखान को इसी युद्ध को जित के बाद मिलती है “

Battle of Kanauj OR BILLGRAM | कनौज या बिलग्राम का युद्ध

कन्नौज का युद्ध 1590 में एक बार फिर से शेरशाह सुरी और हुमायु के बीच में हुआ था और इस बार भी शेर शाह सूरी जित जाता है.

पहले ही शेरशाह ने हुमायू को हरा दिया था लेकिन वो भाग ने में सफल रहा था

इस बार शेरशाह सूरी ने हुमायूं को हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और हुमायु भारत छोड़कर चला गया और ईरान की गलियों में भटकता रहा.

लेकिन फिर शेररसाह सूरी की मृत्यु के बाद वह फिर से भारत आता है और भारत में फिर से सत्ता स्थापित करता है.

Battle of Tallikota | तालीकोटा की लड़ाई

23 जनवरी 1565 में दक्कन की सल्तनतो और विजयनगर साम्राज्य के बीच तालीकोटा का युद्ध  का हुआ था.

जिसमें दक्कन सल्तन का विजय हुआ और विजयनगर साम्राज्य का अंत हुआ था

Battle of Haldighati | हल्दीघाटी का युद्ध

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 में अकबर और राणा प्रताप के बीच में हुई थी.

जिसमे राणाप्रताप को अकबर ने हरा दिया ओर अकबर ने विजय प्राप्त कर दिया था

Battle of Plassey प्लासी का युद्ध

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 में अंग्रेजो और बंगालके नवाब सिराजुद्दोला के बीच में हुआ था.

जिसमे अंग्रेजो अपनी कूड नीतियों के साथ जीत जाते हे और बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला को हार मिली थी

अंग्रेजो की सेना का नेतृत्व रॉबर्ट क्लाईव कर रहा था और सिराजुद्दोला की सेना का नेतृत्व मीर जाफर ने किया था और इसी युद्ध को जीतने के बाद अंग्रेजों ने भारत में अपनी शासन की नींव रखी थी.

Battle Of Wandiwash | वान्दिवाश की लड़ाई

वर्ष 1760 में अंग्रेजों और फ्रांसिसियो के सेना के बीच वांडीवाश का युद्ध हुआ था.

जिसमें फ्रांसिसियो को हार मिली थी और अंग्रेजों ने विजय प्राप्त की थी.

Battle of Buxar | बक्सर का युद्ध

बक्सर का युद्ध 1764 में अंग्रेजी और सिराजुद्दोला,मीर कासिम और शाहआलम-2 के संयुक्त सेना के बीच में हुआ था.

और इसी में भी अंग्रेजों ने अपनी कुण नीतियों से ही  विजय प्राप्त कर दी थी

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Anglo-Mysore Wars | एंग्लो-मैसूर युद्ध

First Anglo-Mysore War | प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध

प्रथम आंग्ल मै 1767-69 ई मे हैदर अली और अंग्रेजो के बीच हुआ था  जिसमे अंग्रेजो की हार हुई । अंग्रेज़ों ने विवशता में हैदर अली की शर्तों पर 4 अप्रैल , 1769 को ‘ मद्रास की संधि ‘ कर ली

Second Anglo-Mysore War | द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध 1780-84

 हैदर अली और अंग्रेजो के बीच यह युद्ध हुआ था इस युद्ध के बीच मेही 7 दिसम्बर , 1782 हैदर अली की मृत्यु हो गई थी , लेकिन  उनके पुत्र और उत्तराधिकारी टीपू सुल्तान ने युद्ध जारी रखा उसने 1784 ई . में सन्धि कर ली , जो मंगलोर की सन्धि कहलाती है , और जिसके आधार पर दोनों पक्षों ने एक दूसरे के भू – भाग वापस कर दिए ।

Third Anglo-Mysore War | तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध – 1790 – 1792

सुल्तान और अंग्रेजो के बीच लड़ाई संधि के द्वारा समाप्त हुई । जिसमें 1792 में श्रीरंगपट्टनम् की संधि हुई थी | 22. चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध – 1798-1799 ई . टीपू सुल्तान और अंग्रेजो के बीच , टीपू की हार हुई और मैसूर शक्ति का पतन हुआ ।

चिलियान वाला युद्ध – 1849 

ईस्ट इंडिया कंपनी और सिखों के बीच हुआ था जिसमे सिखों की हार हुई

भारत – चीन सीमा युद्ध | Indian – China War – 1962 

इसमें अक्साई चीन और अरुणाचल प्रदेश पर चीनी सेना द्वारा भारत के सीमा क्षेत्रो पर आक्रमण किया गया | कुछ दिन तक युद्ध होने के बाद एकपक्षीय युद्ध विराम की घोषणा की गई । भारत को अपनी सीमा के कुछ हिस्सों को छोड़ना पड़ा ।

India – Pakistani War भारत पाक युद्ध – 1965 

पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध जिसमे पाकिस्तान की हार हुई । युद्धविराम के बाद जनवरी 1966 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीजी पाकिस्तान से शांति समझौता करने सोवियत संघ में शामिल उज्बेकिस्तान के ताशकंद शहर गए थे . और वहीं रहस्यमय परिस्थिति में उनका देहांत हुआ | भारत और पाकिस्तान एक – दूसरे के खिलाफ शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगे और आपसी विवाद बातचीत से हल करेंगे . भारत और पाकिस्तान किसी भी हालत में एक – दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे .

भारत पाक युद्ध ( Indo – Pakistani War ) – 1971 

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जिसमे पाकिस्तान की हार हुई । युद्ध के बाद भारत के शिमला में एक संधि पर हस्ताक्षर हुए जिसे शिमला समझौता कहते हैं ( शिमला समझौता – 3 जुलाई 1972 ) जिसमें पूर्वी पाकिस्तान आजाद हो गया और बांग्लादेश के रूप में एक नया देश बना 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की गई भारत पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ ।

कारगिल युद्ध ( Kargil war ) – 1999 

भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुआ युद्ध में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा था | करगिल युद्ध के दौरान 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने ‘ ऑपरेशन विजय ‘ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था और विजय प्राप्त की थी |

तो दोस्तों ये था Battle of india का part – 2 आशा हे आपको पसंद आया होगा अगर पसंद आया होतो ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि सभी लोग इसका लाभ उठा पाए धन्यवाद 

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